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thailisain block (पौड़ी गढ़वाल) — सोशल मीडिया पर वायरल (Uttarakhand) के एक वीडियो में दावा किया गया है कि मंझनी धैज्युली ग्राम को खाली करने का नोटिस जारी हुआ है। यह खबर सुनने के बाद स्थानीय लोगों में बेचैनी और संशय की लहर दौड़ गई है। कई परिवार जिन्होंने सदियों से इस पहाड़ी गाँव में जीवन व्यतीत किया है, अब अपनी जड़ें खोने के भय से चिंतित हैं।

वीडियो में लोगों का कहना है कि नोटिस जंगल‑भूमि या वन सीमा से जुड़े विवाद के चलते जारी हुआ है और कुछ परिवारों को अपनी जमीन तथा आवास खाली करने के लिए कहा गया है। वीडियो में दिख रहे स्थानीय निवासी और लोगों के मत से यह कार्रवाई अघोषित और अचानक प्रतीत हो रही है।

आधिकारिक पुष्टि कहां है?

जिलाधिकारी कार्यालय और ब्लॉक‑स्तरीय अधिकारिक स्रोतों पर इस नोटिस का कोई सार्वजनिक दस्तावेज़ या आधिकारिक घोषणा उपलब्ध नहीं मिली है। ऐसे मामलों में अक्सर सरकारी आदेश, आदेश संख्या और आधिकारिक नोटिस जारी किए जाते हैं — परंतु फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नोटिस किस विभाग द्वारा कब जारी हुआ। इसलिए इसे वर्तमान में एक “दावा‑आधारित” सूचना के रूप में ही माना जाना चाहिए।

स्थानीय बुज़ुर्ग और ग्रामीण बताते हैं कि कुछ परिवार यहाँ कई पीढ़ियों से रह रहे हैं —सौ साल या उससे अधिक समय से भी। ये लोग अपनी खेती, चरागाह और घरों के साथ गहरे जुड़े हुए हैं। पहाड़ी इलाकों में भूमि और आवास केवल आर्थिक साधन नहीं होते, बल्कि सामाजिक‑सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा होते हैं।

इससे जुड़ी संभावित कानूनी और प्रशासनिक वजहें

  • वन क्षेत्र व आरक्षित भूमि विवाद: पहाड़ों में कभी‑कभी सीमा‑रहित या विवादित भूमि के कारण विवाद पैदा होते हैं। कुछ ज़मीनें ऐसे रजिस्ट्री टाइप में हो सकती हैं जिन पर सरकारी रिकॉर्ड स्पष्ट न हों।
  • कब्ज़ा व भूमि लेखा‑जोखा: कहीं‑कहीं जमीनों पर लंबे समय से बने घरों के रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं होते या सांविधिक दस्तावेज़ विवादित होते हैं।
  • सुरक्षा/इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ: कभी‑कभी बड़े कामों के लिए भी जमीन खाली करने के आदेश आ जाते हैं — परन्तु उसके लिए मुआवज़ा और पुनर्वास की प्रक्रिया आवश्यक है।

प्रभावित लोगों के सवाल

स्थानीयों ने प्रशासन से ये प्रश्न उठाए हैं:

  1. नोटिस किस विभाग/अधिकारियों ने जारी किया है? और इसकी तिथि क्या है?
  2. क्या प्रभावितों को मुआवज़ा या पुनर्वास के विकल्प दिए गए हैं?
  3. क्या नोटिस जारी करते समय स्थानीय लोगों को सुनवाई का अवसर दिया गया था?

शासन‑प्रतिक्रिया की मांग

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि प्रशासन तत्काल स्थिति की स्पष्ट जानकारी दे और यदि कोई कानूनी निहित कारण है तो उसे सार्वजनिक कर दे। साथ ही प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा, वैकल्पिक आवास और न्यायसंगत सुनवाई का आश्वासन दिया जाना चाहिए।

पहाड़ी जीवन पर असर

पहाड़ी समाज में जमीन केवल आजीविका का साधन नहीं होती; सामाजिक संबंधों, धार्मिक रस्मों और सांस्कृतिक पहचान का आधार भी होती है। ऐसे में अगर सैकड़ों वर्षों से बसने वाले समुदायों को अपना आशियाना खोना पड़े, तो यह केवल आर्थिक नहीं बल्कि मानसिक और सांस्कृतिक रूप से भी भारी आघात होगा।

वर्तमान में उपलब्ध जानकारी का आधार मुख्यतः सोशल‑मीडिया वीडियो और स्थानीय दावों पर है। जबकि यह मामला गंभीर और चिंताजनक है, परन्तु किसी भी खबर को अंतिम रूप देने से पहले आधिकारिक दस्तावेज़, जिलाधिकारी कार्यालय का बयान या संबंधित विभाग की पुष्टि आवश्यक है।

प्रभावित ग्रामीणों की आवाज़ को सामने लाने के लिए प्रशासन से लिखित जानकारी माँगी जानी चाहिए, स्थानीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जाना चाहिए और यदि मामला सत्तापक्षीय रूप से संवेदनशील है तो राज्य सरकार द्वारा पारदर्शी जांच व पुनर्वासनिर्धारण की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

यह रिपोर्ट सोशल ‑मीडिया पर वायरल वीडियो के दावों और स्थानीय संदर्भ के आधार पर तैयार की गई है। आधिकारिक पुष्टि मिलने पर हम इस खबर को अपडेट करेंगे।

यदि आप मंझनी धैज्युली या थैलिसैण ब्लॉक के किसी निवासी हैं और इस खबर के बारे में आपके पास और जानकारी या दस्तावेज़ हैं, तो कृपया साझा करें — आपकी जानकारी महत्वपूर्ण है।


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By News Desk

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