IBS (इरिटेबल बाउल सिंड्रोम) क्या है?
IBS यानी Irritable Bowel Syndrome एक आम लेकिन अक्सर गलत समझी जाने वाली पेट से जुड़ी समस्या है। इसमें आंतों की कार्यप्रणाली (Functioning) प्रभावित होती है, लेकिन कोई स्थायी घाव, सूजन या कैंसर जैसी बीमारी नहीं होती। यही कारण है कि कई बार टेस्ट नॉर्मल आने के बावजूद मरीज को लंबे समय तक तकलीफ रहती है।
यह समस्या जानलेवा नहीं होती, लेकिन अगर सही तरीके से मैनेज न की जाए तो जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
IBS क्यों होता है? (Causes of IBS)
IBS का कोई एक कारण नहीं होता, बल्कि यह कई फैक्टर्स के मेल से होता है:
- आंतों की मसल्स का जरूरत से ज्यादा या कम सिकुड़ना
- दिमाग और आंत (Gut-Brain Axis) के बीच तालमेल बिगड़ना
- ज्यादा तनाव, चिंता या डिप्रेशन
- बार-बार एंटीबायोटिक लेना
- फूड पॉइजनिंग या पेट का इंफेक्शन ठीक होने के बाद
- नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या
- हार्मोनल बदलाव (खासतौर पर महिलाओं में)
👉 महत्वपूर्ण बात: IBS कोई इंफेक्शन नहीं है और यह छूने से नहीं फैलता।
IBS के प्रमुख लक्षण (Symptoms of IBS)
IBS के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं:
- बार-बार पेट दर्द या मरोड़
- गैस, पेट फूलना
- दस्त (Diarrhea) या कब्ज (Constipation) या दोनों बारी-बारी से
- शौच के बाद भी पेट साफ न होने का अहसास
- मल में म्यूकस (सफेद चिकनाहट)
- तनाव में लक्षणों का बढ़ जाना
IBS के प्रकार
- IBS-D : ज्यादा दस्त
- IBS-C : ज्यादा कब्ज
- IBS-M : कभी दस्त, कभी कब्ज
IBS की पहचान कैसे करें? (Diagnosis)
IBS की पुष्टि किसी एक टेस्ट से नहीं होती। डॉक्टर निम्न तरीकों से पहचान करते हैं:
- मरीज की पूरी हिस्ट्री
- लक्षणों की अवधि (कम से कम 3 महीने)
- ब्लड टेस्ट (एनीमिया, इंफेक्शन देखने के लिए)
- स्टूल टेस्ट
- कभी-कभी अल्ट्रासाउंड या कोलोनोस्कोपी (जरूरत पड़ने पर)
👉 अगर सभी टेस्ट नॉर्मल हैं और लक्षण बने रहते हैं, तब IBS की संभावना ज्यादा होती है।
क्या हमेशा IBS ही होता है? पेट में कीड़े और IBS का भ्रम
बहुत जरूरी बात 👇
कई बार पेट में कीड़े (Intestinal Worms), अमीबायसिस या अन्य परजीवी इंफेक्शन के लक्षण IBS जैसे ही होते हैं:
- गैस
- पेट दर्द
- बार-बार शौच
- कमजोरी
अगर बिना स्टूल टेस्ट कराए सिर्फ IBS की दवा ली जाती रही, तो असली बीमारी छुपी रह जाती है।
👉 इसलिए: IBS मानने से पहले स्टूल टेस्ट बेहद जरूरी है।
IBS में क्या समस्याएं हो सकती हैं?
- बार-बार दवा बदलने की जरूरत
- मानसिक तनाव
- काम में ध्यान न लगना
- सामाजिक जीवन प्रभावित होना
- बार-बार डॉक्टर बदलना
हालांकि IBS से कैंसर नहीं होता – यह डर पूरी तरह गलत है।
डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है?
इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से मिलें:
- अचानक वजन कम होना
- खून की उल्टी या मल में खून
- रात में नींद से जगाने वाला पेट दर्द
- बुखार
- एनीमिया
- 50 साल के बाद पहली बार लक्षण शुरू होना
IBS में घरेलू उपाय (Home Remedies)
- गुनगुना पानी पीना
- इसबगोल (डॉक्टर की सलाह से)
- छाछ में भुना जीरा
- योग: पवनमुक्तासन, वज्रासन
- ध्यान और प्राणायाम
- दिनचर्या तय रखना
IBS में क्या खाएं? (Diet for IBS)
फायदेमंद आहार
- दलिया
- चावल
- दही (प्रोबायोटिक)
- केला
- पपीता
- उबली सब्जियां
क्या न खाएं?
- ज्यादा मिर्च-मसाले
- फास्ट फूड
- कोल्ड ड्रिंक्स
- ज्यादा चाय-कॉफी
- शराब
- मैदा
👉 Low FODMAP Diet IBS में काफी फायदेमंद मानी जाती है।
IBS में दवाइयां – खुद लें या नहीं?
❌ खुद से दवा लेना सही नहीं है।
एलोपैथिक दवाइयां
- Antispasmodic
- Probiotics
- Fiber supplements
- Anxiety control medicines (जरूरत पर)
आयुर्वेदिक इलाज
- त्रिफला (सीमित मात्रा)
- बिल्व
- हिंग्वाष्टक चूर्ण
👉 लंबे समय में आयुर्वेद फायदा कर सकता है, लेकिन सही वैद्य जरूरी है।
होम्योपैथिक इलाज
कुछ लोगों को राहत मिलती है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।
IBS पूरी तरह ठीक हो सकता है या नहीं?
IBS एक मैनेजेबल कंडीशन है। सही डाइट, स्ट्रेस मैनेजमेंट और लाइफस्टाइल से 80% तक कंट्रोल संभव है।
IBS से जुड़े आम भ्रम (Myths)
- ❌ IBS कैंसर है
- ❌ यह इंफेक्शन है
- ❌ जिंदगी भर दवा लेनी पड़ेगी
ये तीनों बातें गलत हैं।
IBS एक ऐसी समस्या है जिसमें धैर्य, सही जानकारी और नियमित जीवनशैली सबसे बड़ा इलाज है। बिना जांच के दवा लेना या हर पेट दर्द को IBS समझ लेना गलत हो सकता है। सही समय पर जांच और संतुलित इलाज से IBS को पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है।
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